Indian Films I Didn’t Like: 6 Big Disappointments
भारतीय सिनेमा ने हमें कई कालजयी फिल्में दी हैं—जिन्हें देखकर हम आज भी तालियाँ बजाते हैं। लेकिन हर फिल्म शहद जैसी मीठी नहीं होती। कुछ फिल्में इतनी प्रमोट की जाती हैं कि दर्शक उम्मीदों से भरे हुए थिएटर में जाते हैं, लेकिन बाहर निकलते वक्त सिर्फ सिरदर्द और टिकट के पैसों का मलाल साथ लेकर आते हैं।
इस लिस्ट में मैंने 6 ऐसी फिल्मों को चुना है, जिनसे उम्मीदें आसमान जैसी थीं, लेकिन नतीजा ज़मीन पर आ गिरा।
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1. Radhe (2021) – जब स्पीड से कहानी गायब हो गई
सलमान खान की Radhe को ईद पर “सलामी ब्लॉकबस्टर” के तौर पर लॉन्च किया गया था। प्रमोशन इतना ज़ोरदार था कि लगा जैसे कोई धमाकेदार फिल्म आने वाली है। लेकिन पर्दे पर जो दिखा, वो Wanted और Tere Naam का फिका-सा रीमिक्स था।
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कहानी: मुंबई का एक ईमानदार पुलिस अफसर शहर से ड्रग्स का सफाया करना चाहता है।
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समस्या: असली मुद्दे (ड्रग्स, युवाओं की तबाही) को गंभीरता से उठाने के बजाय, फिल्म ने बस “हीरो-हीरोइन और कुछ खलनायक” का फॉर्मूला घुमा दिया।
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एक्शन: बहुत तेज़, लेकिन खोखला। लगा जैसे हर फाइट सीन बस यूट्यूब शॉर्ट्स के लिए बनाया गया हो।
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दर्शक प्रतिक्रिया: ज्यादातर फैंस ने ट्विटर पर इसे “ईदी के बदले सिरदर्द” कहा।
निष्कर्ष: सलमान का स्टार पावर टिक सकता है, लेकिन केवल तब जब कंटेंट भी उसके साथ चले।
2. Liger (2022) – जब हाइप गुब्बारे की तरह फूटी
Liger का पोस्टर आया तो लगा कि “Pan-India next big thing” है। विजय देवरकोंडा का बॉलीवुड डेब्यू, अनन्या पांडे की मौजूदगी, और करण जौहर का धर्मा प्रोडक्शन—फिल्म रिलीज़ से पहले ही हिट लग रही थी।
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कहानी: एक स्टैमरिंग फाइटर जो MMA चैंपियन बनना चाहता है। बीच में रोमांस, माँ का त्याग, और देशभक्ति भी घुसी हुई।
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समस्या: सब कुछ डालने की कोशिश में फिल्म हज़म ही नहीं हुई। कहानी बिखरी हुई और किरदारों का विकास न के बराबर।
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माइक टायसन कैमियो: सुनकर लगा “Wow”, देखकर लगा “Why?”
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डायलॉग्स: सोशल मीडिया पर मज़ाक का विषय बन गए, जैसे – “Chai peene se energy aati hai, beer peene se courage aata hai।”
निष्कर्ष: हाइप से फिल्म नहीं बिकती, कहानी से बिकती है।
3. Race 3 (2018) – जब थ्रिलर बनी कॉमेडी
Race सीरीज़ का नाम सुनते ही दर्शकों को उम्मीद रहती है ट्विस्ट, मिस्ट्री और स्मार्ट स्क्रीनप्ले की। लेकिन Race 3 देखने के बाद लोग बस यही बोले—“हमारे बिज़नेस की कोई नींव नहीं है।”
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कहानी: परिवार के बीच धन-दौलत और धोखाधड़ी। लेकिन ट्विस्ट इतने कमजोर थे कि पाँच मिनट बाद ही समझ आ जाता था कि अगला क्या होगा।
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एक्शन सीक्वेंस: हवा में उड़ते गाड़ियाँ, बेमतलब ग्रीन-स्क्रीन और ओवरएक्टिंग।
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डायलॉग्स: “Our business is our business, none of your business”… मीम कल्चर का फुल टाइम फ्यूल।
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दर्शक प्रतिक्रिया: सिनेमाघर में लोग हँस रहे थे, जहाँ उन्हें चौंकना चाहिए था।
निष्कर्ष: सिर्फ स्टार कास्ट और चमक-धमक फिल्म को Race नहीं बना सकती।
4. Brahmāstra (2022) – जब VFX चमका, लेकिन कहानी सो गई
भारत का पहला “एस्ट्रावर्स” बनाने का सपना जितना बड़ा था, Brahmāstra का नतीजा उतना ही अधूरा लगा।
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कहानी: प्राचीन अस्त्र, रहस्यमयी समाज और एक प्रेम कहानी।
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समस्या: रणबीर-आलिया की केमिस्ट्री ज़बरदस्ती लग रही थी। डायलॉग्स इतने कमजोर थे कि VFX की चमक भी उन्हें छिपा नहीं सकी।
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प्लस पॉइंट: विजुअल्स और साउंड डिज़ाइन इंटरनेशनल लेवल के।
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माइनस पॉइंट: वर्ल्ड-बिल्डिंग अधूरी, लॉजिक गायब।
दर्शक प्रतिक्रिया: सिनेमाघरों में “वाह” और “हाय-हाय” दोनों आवाज़ें सुनाई दीं।
निष्कर्ष: स्पेशल इफेक्ट्स जादू दिखा सकते हैं, लेकिन जादू तभी टिकता है जब कहानी मज़बूत हो।
5. Adipurush (2023) – जब श्रद्धा का मज़ाक बन गया
रामायण जैसी पौराणिक महागाथा पर फिल्म बनाना आसान नहीं है। Adipurush ने वादा किया था कि वो इस गाथा को नए अंदाज़ में पेश करेगी, लेकिन स्क्रीन पर यह श्रद्धा की बजाय विवाद और मज़ाक का कारण बन गई।
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समस्या:
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CGI इतना खराब कि कई जगह किरदार कार्टून जैसे लगे।
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रावण का लुक वीडियो गेम विलेन जैसा।
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संवाद जो किसी भी गंभीर पौराणिक फिल्म में फिट नहीं बैठते। (“तेरे बाप की जलेगी”)।
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दर्शक प्रतिक्रिया: सोशल मीडिया पर बायकॉट की माँग, और “रामायण का अपमान” जैसी टिप्पणियाँ।
निष्कर्ष: धार्मिक और पौराणिक कहानियों के साथ छेड़छाड़ दर्शक आसानी से माफ़ नहीं करते।
6. Ae Dil Hai Mushkil (2016) – जब इमोशन नकली लगे
करण जौहर की यह फिल्म रोमांस और दोस्ती की एक जटिल कहानी बताना चाहती थी। लेकिन दर्शकों को यह फिल्म ज़्यादा “टॉक्सिक रिलेशनशिप गाइड” जैसी लगी।
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कहानी: रणबीर कपूर का किरदार एकतरफा प्यार में पागल, जो दोस्ती और इश्क़ के बीच उलझा रहता है।
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समस्या: किरदार यथार्थवादी नहीं, बल्कि ओवर-ड्रामा लगे।
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इमोशनल ट्विस्ट: अचानक टर्मिनल इलनेस का ऐंगल जोड़ना मजबूरन और कृत्रिम लगा।
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प्लस पॉइंट: गानों का खज़ाना (Channa Mereya, Ae Dil Hai Mushkil)।
निष्कर्ष: म्यूज़िक शानदार था, लेकिन कहानी गानों के बराबर नहीं ठहर सकी।
तुलना एक नज़र में
| फिल्म | साल | मुख्य समस्या | क्या अच्छा था? |
|---|---|---|---|
| Radhe | 2021 | सतही कहानी, रीपीटेड एक्शन | सलमान खान का स्टार पावर |
| Liger | 2022 | बिखरी कहानी, डायलॉग क्रिंज | हाइप और प्री-रिलीज़ बज़ |
| Race 3 | 2018 | कमजोर स्क्रिप्ट, फनी डायलॉग्स | स्टार कास्ट |
| Brahmāstra | 2022 | वर्ल्ड-बिल्डिंग अधूरी | शानदार VFX |
| Adipurush | 2023 | खराब CGI, विवादित डायलॉग्स | बड़े पैमाने की कोशिश |
| Ae Dil Hai Mushkil | 2016 | ओवर-ड्रामा, अस्वस्थ रिश्ते | म्यूज़िक |
सबक जो मिली निराशा से
इन फिल्मों की सबसे बड़ी सीख यही है कि स्टार पावर, हाइप और CGI अच्छे कंटेंट की जगह नहीं ले सकते।
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Radhe और Race 3 ने दिखाया कि फॉर्मूला फिल्में अब काम नहीं करतीं।
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Liger ने साबित किया कि ओवर-प्रमोशन दर्शकों को थिएटर तक खींच तो सकता है, लेकिन कंटेंट कमजोर हुआ तो सोशल मीडिया उन्हें गिरा भी देता है।
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Brahmāstra ने यह दिखाया कि विजुअल्स शानदार हो सकते हैं, पर कहानी ही असली हीरो है।
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Adipurush ने हमें याद दिलाया कि धार्मिक और पौराणिक कथाओं को सम्मान और संवेदनशीलता से दिखाना जरूरी है।
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Ae Dil Hai Mushkil ने दिखाया कि नकली इमोशन अब काम नहीं करते, दर्शक सच्चाई चाहते हैं।
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