पाँच अनदेखी लेकिन शानदार हिंदी फ़िल्में

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बॉलीवुड अक्सर बड़े बजट और “100 करोड़ क्लब” वाली फिल्मों के लिए जाना जाता है। लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं जो शोर-शराबे से दूर रहकर भी गहरी कहानियाँ कह जाती हैं। आइए देखते हैं पाँच ऐसी फिल्मों को, जो अपने संवेदनशील विषय और शानदार अभिनय के कारण खास हैं।

1. October (2018) – चुपचाप बहती भावनाओं की कविता

शूजीत सरकार की October उन फिल्मों में से है जो पारंपरिक बॉलीवुड ढाँचे से अलग खड़ी होती है। इस फिल्म में ना ऊँचे-ऊँचे डायलॉग हैं और ना ही नाटकीय बैकग्राउंड म्यूज़िक। बल्कि यह एक संवेदनशील और सधी हुई कहानी है, जो दर्शकों को भीतर तक भावुक कर देती है। वरुण धवन ने इसमें "डैन" नाम के होटल ट्रेनी का किरदार निभाया है। उसकी ज़िंदगी तब बदलती है जब वह एक हादसे के बाद कोमा में चली गई लड़की की देखभाल करते-करते जीवन का असली मतलब समझने लगता है।

बॉक्स ऑफिस कमाई:
भारत में लगभग ₹27.75 करोड़ (पहला हफ़्ता) और विश्वभर में लगभग ₹58 करोड़।

प्रोडक्शन हाउस:
Rising Sun Films और Kino Works।

रिलीज़ डेट:
13 अप्रैल 2018।

कहाँ देखें:
Amazon Prime Video और Amazon Store पर उपलब्ध।

2. A Death in the Gunj (2016) – संवेदनशीलता की अनसुनी चीख

कोंकणा सेन शर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी 1979 के मैक्लुस्कीगंज (झारखंड) में एक पारिवारिक अवकाश पर घूमती है। विक्रांत मैसी का किरदार "शूटू" धीरे-धीरे दर्शाता है कि कैसे समाज संवेदनशील पुरुषों को नज़रअंदाज़ करता है और भीतर-ही-भीतर तोड़ देता है। फिल्म की खूबी इसकी सूक्ष्मता है—छोटे-छोटे ताने, मज़ाक और उपेक्षा ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं।

बॉक्स ऑफिस कमाई:
करीब ₹0.96 करोड़ (सीमित रिलीज़ के कारण)।

प्रोडक्शन हाउस:
Studioz IDrream और MacGuffin Pictures।

रिलीज़ डेट:
2 जून 2017।

कहाँ देखें:
Amazon Prime Video पर उपलब्ध।

3. Mard Ko Dard Nahi Hota (2019) – हंसी, दिल और ज़बरदस्त एक्शन

वासन बाला की यह फिल्म सुपरहीरो शैली पर व्यंग्य और श्रद्धांजलि दोनों है। इसमें एक युवक की कहानी है जिसे एक दुर्लभ बीमारी के कारण दर्द महसूस नहीं होता। यही उसकी ताकत भी है और कमज़ोरी भी। अभिमन्यु दासानी ने अपने डेब्यू में भोलेपन और मार्शल-आर्ट्स स्टाइल दोनों को बेहतरीन ढंग से निभाया है।

बॉक्स ऑफिस कमाई:
भारत में व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही, लेकिन विदेशों और खासतौर पर फ़िल्म प्रेमियों में कल्ट स्टेटस पा चुकी है।

प्रोडक्शन हाउस:
RSVP Movies (रोनी स्क्रूवाला)।

रिलीज़ डेट:
21 मार्च 2019।

कहाँ देखें:
Netflix पर उपलब्ध।

4. Kadvi Hawa (2017) – सूखे और निराशा की कड़वी सच्चाई

नीला माधब पांडा द्वारा निर्देशित यह फिल्म भारत के ग्रामीण इलाकों में जलवायु परिवर्तन के असली असर को सामने लाती है। इसमें संजय मिश्रा ने एक अंधे किसान की भूमिका निभाई है जो सूखे और कर्ज़ के बोझ में दबा है। रणवीर शौरी ने एक ऐसे कर्ज वसूलने वाले का किरदार निभाया है जो खुद भी अपने हालात से जूझ रहा है। फिल्म बताती है कि पर्यावरणीय संकट धीरे-धीरे और खामोशी से जीवन को खत्म करता है।

बॉक्स ऑफिस कमाई:
करीब ₹8–9 करोड़।

प्रोडक्शन हाउस:
Eros International, Drishyam Films और निला माधब पांडा।

रिलीज़ डेट:
24 नवंबर 2017।

कहाँ देखें:
अभी किसी बड़े OTT पर नियमित रूप से उपलब्ध नहीं, DVD या टेलीविज़न प्रीमियर के ज़रिए देखा जा सकता है।

5. Sonchiriya (2019) – डाकुओं की त्रासदी और मुक्ति की तलाश

अभिषेक चौबे की Sonchiriya चंबल के डाकुओं की कहानी है, लेकिन इसे अलग बनाती है इसका दृष्टिकोण। यहाँ डकैत अपराधी नहीं, बल्कि टूटे हुए इंसान हैं जो अपने अतीत और अपराधबोध से जूझते हैं। सुशांत सिंह राजपूत, मनोज बाजपेयी, भूमि पेडनेकर और रणवीर शौरी की अदाकारी ने फिल्म को और गहराई दी। बुंदेली भाषा का प्रयोग इसकी वास्तविकता को और प्रामाणिक बनाता है।

बॉक्स ऑफिस कमाई:
भारत में लगभग ₹6–7 करोड़ और वर्ल्डवाइड करीब ₹9–10 करोड़।

प्रोडक्शन हाउस:
RSVP Movies और MacGuffin Pictures।

रिलीज़ डेट:
1 मार्च 2019।

कहाँ देखें:
ZEE5 पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध।

निष्कर्ष

ये पाँचों फिल्में "100 करोड़ क्लब" वाली चमक-धमक से दूर हैं। इनमें बड़े सेट और ऊँची आवाज़ वाले गाने नहीं, बल्कि असली कहानियाँ, संवेदनशील किरदार और समाज की गहरी झलक मिलती है। चाहे वह October की चुपचाप बहती भावनाएँ हों, Sonchiriya की धूल भरी सच्चाइयाँ, या Kadvi Hawa की करुण वास्तविकता—ये फिल्में हमें याद दिलाती हैं कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा को झकझोरने वाली कला भी हो सकता है।


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