किसी का भाई किसी की जान – क्या यह वाकई देखने लायक थी?
सलमान खान की फिल्में जब भी आती हैं, दर्शकों की उम्मीदें काफी ऊंची होती हैं। लेकिन ‘किसी का भाई किसी की जान’ ने कई दर्शकों को निराश कर दिया। फिल्म में मसाला, एक्शन, और इमोशन डालने की कोशिश तो हुई, लेकिन कई जगह यह भारी पड़ गई। चलिए, देखते हैं कि इस फिल्म में क्या सही था और क्या इसे कमजोर बना गया।
कहानी – पुरानी बोतल में वही पुरानी शराब
यह कहानी भाईजान (सलमान खान) की है, जो अपने तीन छोटे भाइयों के साथ रहते हैं। भाईजान ने शादी न करने की कसम खाई है, लेकिन फिर उनकी जिंदगी में भाग्यलक्ष्मी (पूजा हेगड़े) आती हैं और सब बदल जाता है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब भाग्यलक्ष्मी के परिवार को एक खतरनाक विलेन से खतरा होता है, और भाईजान उन्हें बचाने के लिए मैदान में उतरते हैं।
अगर यह कहानी आपको जानी-पहचानी लग रही है, तो आप गलत नहीं हैं। यह दक्षिण भारतीय फिल्म ‘वीरम’ की रीमेक है, जिसमें कुछ छोटे-मोटे बदलाव किए गए हैं। हालांकि, फिल्म इस रीमेक को अलग तरीके से पेश करने में सफल नहीं हो पाई।
फिल्म की सबसे बड़ी कमियां और प्लॉट होल्स
1. स्क्रिप्ट में नयापन नहीं
फिल्म की शुरुआत से ही दर्शकों को यह अंदाजा हो जाता है कि आगे क्या होने वाला है।
- सलमान खान का किरदार पहले शादी के खिलाफ होता है, फिर अचानक प्यार में पड़ जाता है।
- हीरो की प्रेमिका का परिवार किसी खलनायक से परेशान होता है।
- हीरो सबको बचाने के लिए अकेला मैदान में कूद जाता है और चमत्कारी तरीके से जीत भी जाता है।
इसमें कोई रोमांच नहीं है, कोई ऐसा मोड़ नहीं जो दर्शकों को चौंका दे।
2. किरदारों की गहराई नहीं
सलमान खान के किरदार में वही पुरानी ‘दबंग’ वाली छवि देखने को मिलती है – बिना वजह गुंडों को उड़ाना, अपनी बहादुरी की कहानियाँ सुनाना और भारी-भरकम डायलॉग बोलना।
- पूजा हेगड़े का किरदार सिर्फ एक ‘डैम्सल इन डिस्ट्रेस’ की तरह लगता है, जिसका फिल्म की असली कहानी में कोई खास योगदान नहीं है।
- विलेन (जगपति बाबू) को उतना ताकतवर नहीं दिखाया गया है कि वह हीरो के सामने एक मजबूत चुनौती पेश कर सके।
- जस्सी गिल, शहनाज़ गिल, राघव जुयाल और सिद्धार्थ निगम जैसे टैलेंटेड कलाकार भी फिल्म में सिर्फ बैकग्राउंड फिलर के तौर पर मौजूद हैं।
3. इमोशन और कॉमेडी जबरदस्ती डाली गई
फिल्म में कुछ सीन्स ऐसे हैं, जहां इमोशन और कॉमेडी को मिलाने की कोशिश की गई, लेकिन यह काम नहीं करती।
- कई बार जब गंभीर सीन चल रहा होता है, तभी अचानक हल्की-फुल्की कॉमेडी डाल दी जाती है, जिससे सीन का प्रभाव खत्म हो जाता है।
- सलमान खान की पुरानी फिल्मों से मिलते-जुलते पंचलाइंस को जबरदस्ती फिट करने की कोशिश की गई, जो कि अप्रभावी लगती है।
4. एक्शन सीक्वेंस – लॉजिक को पूरी तरह भूल जाइए
सलमान खान की फिल्मों में ओवर-द-टॉप एक्शन होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस फिल्म में यह हद से ज्यादा है।
- भाईजान बिना किसी परेशानी के 20-30 गुंडों को एक ही झटके में गिरा देते हैं, लेकिन खुद को एक खरोंच भी नहीं आती।
- कुछ सीन्स इतने अविश्वसनीय हैं कि दर्शक हंसने पर मजबूर हो जाते हैं।
- फाइट सीक्वेंस में नयापन नहीं है। वही पुराने स्टाइल के एक्शन, जो पहले भी कई बार देखे जा चुके हैं।
5. सपोर्टिंग कास्ट का सही इस्तेमाल नहीं हुआ
फिल्म में जस्सी गिल, शहनाज़ गिल, राघव जुयाल और सिद्धार्थ निगम जैसे कलाकार मौजूद हैं, लेकिन इन्हें सिर्फ एक-दो डायलॉग देकर छोड़ दिया गया।
- इनका किरदार सिर्फ भाईजान के इर्द-गिर्द घूमता है, इनका खुद का कोई खास योगदान फिल्म की कहानी में नहीं दिखता।
- अगर इन किरदारों को अच्छी तरह से विकसित किया जाता, तो फिल्म और दिलचस्प हो सकती थी।
फिल्म की कुछ अच्छी बातें
अब यह कहना गलत होगा कि फिल्म में कुछ भी अच्छा नहीं था।
- सलमान खान के फैंस के लिए यह फिल्म एक ट्रीट हो सकती है। अगर आपको सिर्फ उनका स्टाइल, एक्शन और स्वैग पसंद है, तो आप फिल्म को एन्जॉय कर सकते हैं।
- बैकग्राउंड म्यूजिक ठीक-ठाक है, कुछ गाने भी सुनने लायक हैं।
- पारिवारिक दर्शकों को ध्यान में रखते हुए इसे एक साफ-सुथरी एंटरटेनमेंट फिल्म बनाने की कोशिश की गई है।
क्या ‘किसी का भाई किसी की जान’ देखने लायक है?
अगर आपको स्मार्ट कहानी, दमदार स्क्रीनप्ले और सस्पेंस से भरपूर फिल्में पसंद हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है। लेकिन अगर आप बिना किसी तर्क-वितर्क के सिर्फ एक हल्की-फुल्की मसाला फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह आपके लिए ठीक-ठाक हो सकती है।
रेटिंग: ⭐⭐ (2/5) – केवल कट्टर सलमान खान फैंस के लिए!
‘किसी का भाई किसी की जान’ एक औसत दर्जे की फिल्म है, जो केवल सलमान खान की स्टार पावर के सहारे खड़ी है। इसमें नयापन, गहरी कहानी, या दमदार किरदारों की कमी है। लेकिन फिर भी, अगर आप एक हल्की-फुल्की, बिना लॉजिक की एंटरटेनमेंट फिल्म देखना चाहते हैं, तो इसे एक बार देख सकते हैं।
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