बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप लेकिन दिल से हिट: कुछ कम आंके गए भारतीय फिल्मी रत्न
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कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो असाधारण होती हैं, लेकिन फिर भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पातीं। इसकी कई वजहें हो सकती हैं—खराब मार्केटिंग, गलत समय पर रिलीज़, या फिर बस इतनी आगे की सोच वाली कि दर्शक उसे तब समझ ही नहीं पाते। लेकिन सिर्फ इसलिए कि कोई फिल्म कमाई नहीं कर पाई, इसका मतलब ये नहीं कि वो अच्छी नहीं थी।
कई फिल्में बाद में कल्ट क्लासिक बन जाती हैं और लोग उन्हें तब ज्यादा पसंद करने लगते हैं जब वे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होती हैं। आइए कुछ ऐसी ही भारतीय फिल्मों के बारे में बात करें जो बॉक्स ऑफिस पर तो फ्लॉप हुईं, लेकिन समय के साथ उनकी कद्र बढ़ती गई।
वो भारतीय फिल्में जिन्हें ज़्यादा प्यार मिलना चाहिए था
1. तुंबाड़ (2018) – हॉरर-फैंटेसी का बेहतरीन नमूना
फिल्म की कहानी विनायक नाम के एक आदमी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो तुंबाड़ नाम के गाँव में छिपे खजाने की तलाश में रहता है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, कहानी और विज़ुअल्स शानदार हैं, लेकिन इसकी रिलीज़ के समय इसे सही तरीके से प्रमोट नहीं किया गया। भारतीय दर्शक इस तरह की हॉरर-फैंटेसी को देखने के लिए तैयार नहीं थे, इसलिए बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को खास सफलता नहीं मिली।
हालांकि, समय के साथ यह फिल्म कल्ट क्लासिक बन गई है और अब इसे भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन हॉरर फिल्मों में से एक माना जाता है।
2. रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर (2009) – एक अंडरडॉग की प्रेरणादायक कहानी
रणबीर कपूर ने 2000 के दशक के अंत में कई हिट फिल्में दीं, लेकिन रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर उनकी बाकी फिल्मों से बिल्कुल अलग थी।
यह फिल्म हरप्रीत सिंह बेदी की कहानी है, जो एक युवा सेल्समैन है और ईमानदारी से व्यापार करने में विश्वास रखता है, जबकि उसकी इंडस्ट्री भ्रष्टाचार से भरी हुई है।
फिल्म की कहानी रियलिस्टिक थी और इसमें कोई मसाला एंटरटेनमेंट नहीं था। दर्शकों को रणबीर से कुछ और उम्मीद थी, इसलिए फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही। लेकिन आज इसे एक बेहतरीन प्रेरणादायक फिल्म के रूप में देखा जाता है।
3. स्वदेश (2004) – शाहरुख़ खान की सबसे अर्थपूर्ण फिल्म
आशुतोष गोवारिकर द्वारा निर्देशित यह फिल्म मोहन भार्गव नाम के एक वैज्ञानिक की कहानी है, जो नासा में काम करता है और भारत लौटकर अपने गाँव की समस्याओं को समझता है। यह फिल्म देशभक्ति, ग्रामीण विकास और आत्म-खोज की एक खूबसूरत यात्रा है।
लेकिन क्योंकि फिल्म धीमी गति की थी और इसमें कोई बड़े कमर्शियल एलिमेंट नहीं थे, इसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। फिर भी, स्वदेश को अब एक मास्टरपीस के रूप में देखा जाता है और यह समय के साथ और ज्यादा पसंद की जाने लगी है।
4. अग्ली (2013) – एक डार्क थ्रिलर जो सभी के बस की बात नहीं थी
फिल्म काफी इंटेंस थी और इसके इमोशनल पहलू बहुत गहरे थे, जिससे यह आम दर्शकों के लिए थोड़ी भारी साबित हुई। इस कारण, अग्ली को बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफलता नहीं मिली।
लेकिन समय के साथ यह फिल्म सिनेप्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हुई और इसे अब भारतीय सिनेमा की बेहतरीन थ्रिलर फिल्मों में से एक माना जाता है।
5. सोनचिड़िया (2019) – एक दमदार डकैत ड्रामा जो सही दर्शकों तक नहीं पहुंच पाया
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और परफॉर्मेंस बेहतरीन थीं, लेकिन इसकी मार्केटिंग कमजोर रही। दर्शकों को फिल्म के बारे में ज्यादा जानकारी ही नहीं मिली, और इस वजह से यह बॉक्स ऑफिस पर असफल रही।
हालांकि, जो भी इस फिल्म को देखने गए, उन्होंने इसकी गहराई और वास्तविकता को सराहा। अब इसे डकैती पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में गिना जाता है।
6. मद्रास कैफे (2013) – एक राजनीतिक थ्रिलर जिसे एक्शन फिल्म समझ लिया गया
फिल्म ने काफी गंभीर और वास्तविक अप्रोच लिया, जिससे यह आम दर्शकों के लिए थोड़ा अलग अनुभव था। साथ ही, इसमें कुछ राजनीतिक विवाद भी जुड़ गए, जिससे इसकी व्यावसायिक सफलता पर असर पड़ा।
हालांकि, अब इस फिल्म को एक बेहतरीन, थॉट-प्रोवोकिंग थ्रिलर के रूप में देखा जाता है जो भारतीय सिनेमा की मेच्योरिटी को दर्शाती है।
7. आँखों देखी (2014) – जीवन को देखने का एक नया नजरिया
यह फिल्म जीवन, दृष्टिकोण और इंसानी रिश्तों के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। हालांकि, फिल्म में कोई बड़े सितारे नहीं थे और इसकी विषयवस्तु बहुत नॉन-कमर्शियल थी, इसलिए इसे ज्यादा दर्शक नहीं मिले।
लेकिन जो लोग इसे देख चुके हैं, वे इसे भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक मानते हैं।
आखिर बेहतरीन फिल्में भी क्यों फ्लॉप हो जाती हैं?
कई बार एक अच्छी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती। इसके पीछे कुछ वजहें हो सकती हैं:
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खराब मार्केटिंग – जब फिल्म सही तरीके से प्रमोट नहीं होती, तो सही दर्शकों तक नहीं पहुंच पाती।
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गलत समय पर रिलीज़ – अगर कोई फिल्म ऐसे समय पर रिलीज़ हो जब दर्शकों का मूड अलग हो, तो उसका असर पड़ सकता है।
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नॉन-कमर्शियल कंटेंट – कुछ फिल्में आम दर्शकों के लिए नहीं होतीं, और उन्हें अपनी ऑडियंस मिलने में समय लगता है।
सौभाग्य से, अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन फिल्मों को नई जिंदगी मिल रही है।
हर शानदार फिल्म हिट नहीं होती, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह देखने लायक नहीं है। ऊपर बताई गई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुईं, लेकिन वे भारतीय सिनेमा की कुछ सबसे बेहतरीन कृतियों में गिनी जाती हैं।
अगर आपने ये फिल्में नहीं देखी हैं, तो जरूर देखें—हो सकता है कि ये आपकी अगली फेवरेट फिल्म बन जाएं!
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